
इस खास वजह से भी सच दबाए नहीं दबता

हर रिश्ता विश्वास की मजबूत नींव पर खड़ा रहता है। किसी भी तरह से भरोसा कमजोर होते ही पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों के साथ जिंदगी में भी उतार-चढ़ाव आने लगते हैं।
शास्त्रों में रिश्तों में विश्वास को कायम रखने के लिए ही जिस सूत्र को जीवन में उतारने, अपनाने के लिए सबसे जरूरी माना गया है। वह सूत्र चरित्र, व्यक्तित्व, व्यवहार और विचार को इतना पावन बना देता है कि इंसान को शक्ति और आत्मविश्वास से भर हमेशा निर्भय रखता है। ऐसे सूत्र व इंसान के आगे कोई भी झूठ या पाखंड टिक नहीं पाता। शास्त्रों में बताया यह बेजोड़ सूत्र है - सत्य।
शास्त्रों के मुताबिक सत्य ही भगवान है। इसलिए आचरण, विचार, वाणी, कर्म, संकल्प सभी में सत्य का होना ईश्वर का जप ही है। फिर इंसान अगर देव उपासना के धार्मिक कर्मकाण्डों से चूक भी जाए तो भी वह भगवान का कृपा पात्र बना रहता है। यही सत्य भक्त और भगवान के संबंधों में भी विश्वास की बड़ी अहमियत उजागर करता है। जानिए सच की वह शक्ति, जिसके आगे कोई भी झूठ उजागर होने से नहीं बचता -
हिन्दू धर्मग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता में भी सत्य की अहमियत व ताकत बताते हुए लिखा गया है कि -
नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सत:।
सरल अर्थ है कि असत्य नाशवान होता है, बल्कि सत्य का कभी नाश नहीं होता, उसमें कोई बदलाव नहीं होता है।
किंतु इसके उलट इंसान सांसारिक जीवन में नष्ट होने वाली चीजों या विषयों से मोह करता है, किंतु सत्य जैसे न खत्म होने वाले अमरत्व के सूत्र अपनाने में काफी सोच-विचार और तर्क करता है। जबकि सत्य को संकल्प के साथ अपनाने की कोशिश करें तो वह इंसान की ताकत बन जीवन में शांति व सुख लाकर प्रतिष्ठा और यश का कारण बनता है।










