
प्रेम प्रकट करने के लिए ये बातें जरुरी हैं...

हनुमानजी को रामकथा से उतना ही प्रेम है जितना हमें हमारे प्राणों से है। राम को पाने का सबसे सरल मार्ग है हनुमान। हनुमानजी ने कहा था कि जब तक पृथ्वी पर रामकथा होती रहेगी तब तक में पृथ्वी पर रहूंगा। नारद मुनि ने भी हनुमानजी को भगवान शिवशंकर का 11वां रूद्रावतार बताया है। साथ ही नारद ने 11 प्रकार की आसक्ति का वर्णन भी किया है, जो हनुमानजी में मिलती हैं।
लोगों ने आसक्ति को गलत मान लिया जबकि आसक्ति तो भक्ति की सिढ़ी होती है और आसक्ति से प्रेम प्रकट होता है। प्रेम प्रकट करने के लिए सरल, शुद्ध, साधु मन तथा शुद्ध वचन का होना जरूरी है।
जीवन में पर्वत की तरह स्थिर और दृढ़ निश्चयी महापुरुष मिल जाए तो उसकी सेवा करने से भी प्रेम प्रकट होता है। आचार्य आचार से प्रकट होता है तथा जो व्यक्ति आचार-विचार, खान-पान, वचन, कर्म व वस्त्र आदि से सात्विक होता है वो ही सही मायने में आचार्य होता है।
सत्य कभी अंतिम नहीं होता है और जीवन का अंतिम सत्य परमात्मा होता है। रामभक्ति में हनुमान चालीसा का जितना महत्व है उतना ही कृष्ण भक्ति में यमुनाष्टक का महत्व है।
परमात्मा तो पूर्ण ब्रह्मा है, उसे टुकड़ों में बांटना अनुचित है। भगवान को छोटा मत करो न ही उसे बांटो। गरीब को धर्म के नाम पर संकीर्ण मत बनाओं बल्कि लोगों को इस जड़ता से बाहर निकालो।
पूज्य बापू की कथा से लिए गए अंश...












