
परंपरा: किसी भी शुभ कार्य में कलश का उपयोग क्यों किया जाता है?

हिंदू धर्म में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में कलश स्थापना की जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि पौराणिक मान्यता के अनुसार कलश में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तथा मातृ शक्तियों का निवास होता है। सीताजी की उत्पत्ति के विषय में धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि राजा जनक के राज्य में जब सूखा पड़ा और देवर्षि नारद के कहने पर राजा जनक ने हल चलाया तो हल चलाते समय उसका फाल(धार) भूमि में गड़े हुए घड़े(कलश) से टकराया जिससे तेज ध्वनि उत्पन्न हुई और फूटे हुए कलश के अंदर से बालरूप सीता प्राप्त हुई। समुद्र मंथन के समय प्राप्त अमृत भी कलश में ही था।
प्राचीन मंदिरों या तस्वीरों में भी भगवती लक्ष्मी को दो हाथियों द्वारा कलश जल से स्नान कराते हुए चित्रित किया गया है। यही कारण है कि कलश को हिंदू धर्म में पवित्र तथा मंगल का प्रतीक माना गया है। जब किसी भी पूजन में कलश स्थापित किया जाता है तो यह माना जाता है कि कलश रूप में त्रिदेव तथा मातृशक्ति विराजमान है। शुभ कार्यों जैसे- गृह प्रवेश, गृह निर्माण, विवाह पूजा, अनुष्ठान आदि में कलश की स्थापना इसीलिए की जाती है। कलश को लाल वस्त्र, नारियल, आम के पत्तों, कुशा आदि से अलंकृत करने का विधान भी है।










