शास्त्रों के अनुसार ईश्वर कण-कण में विराजमान हैं, हर जीव में परमात्मा निवास करते हैं। ईश्वर की साक्षात् अनुभूति के लिए मंदिर या देवालय बनाए गए हैं और हमारे घरों में भी भगवान के लिए अलग स्थान रहता है। मंदिर में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं या चित्र रखे जाते हैं। जब भी श्रद्धालु कोई मनोकामना लेकर मंदिर या देवालय में जाते हैं तो वहां कुछ समय बैठते अवश्य हैं। मंदिर में कैसे बैठना चाहिए इस संबंध में भी कुछ खास बातें बताई गई हैं। इन बातों का पालन करने पर मंदिर जाने का पूर्ण पुण्य लाभ प्राप्त होता है।