शनि और रावण से जुड़ा प्रसंग इस प्रकार है... उस समय रावण और मंदोदरी के पुत्र मेघनाद का जन्म होने वाला था। रावण चाहता था कि उसका पुत्र अजेय हो जिसे कोई भी देवी-देवता हरा न सके, रावण चाहता था कि उसका पुत्र दीर्घायु हो, उसकी मृत्यु हजारों वर्षों बाद ही हो। रावण चाहता था कि उसका पुत्र परम तेजस्वी, पराक्रमी, कुशल यौद्धा, ज्ञानी हो। रावण एक प्रकाण्ड पंडित और ज्योतिष का जानकार था इसीकारण मेघनाद के जन्म के समय उसने ज्योतिष के अनुसार सभी ग्रहों और नक्षत्रों को ऐसी स्थिति में बने रहने का आदेश दिया कि उसके पुत्र में वह सभी गुण आ जाए जो वह चाहता है।