कुंडली में शनि की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। यदि शनि जातक की कुंडली में तीसरे, छठे, 10वें या 11वें भाव में है तो शिशिर में शुरू किए गए सभी नए कार्य उसके लिए शुभ फलदायी होते हैं। उसे कीर्ति, उन्नति व मान मिलता है। यदि कुंडली में शनि लग्न, दूसरे, पांचवे, सातवें और नवें भाव में हो तो जातक को शिशिर में सतर्क और श्रमशील रहना होता है।