ज्योतिष की मान्यता में इन ऋतुओं का प्रतिनिधित्व सौर मंडल के भ्रमणशील ग्रहों के अधीन है। जैसे वसंत ऋतु शुक्र व केतु के प्रभाव में होती है। ग्रीष्म सूर्य, मंगल व राहु के, वर्षा ऋतु चंद्रमा के, शरद बुध के, हेमंत बृहस्पति और शिशिर ऋतु शनि के प्रभाव में होती है। शिशिर में पुष्य नक्षत्र की पूर्णिमा से पौष का समापन होता है। पुष्य का अधिपति शनि है, जो सफलता की दिशा तय करता है।