शनि की प्रसन्नता सफलता का आधार बन जाती है। चूंकि शिशिर में शनि का प्रभाव होता है, इसीलिए इसी ऋतु में ठंड का प्रकोप भी बढ़ा हुआ होता है। शनि, शुक्र और राहु से मैत्री रखता है। गुरु व केतु से समभाव और सूर्य, चंद्र व मंगल से शत्रु भाव रखता है। शनि के प्रभाव के कारण ही इस ऋतु में बल, पौरूष व स्वास्थ्य की साधना सफल होती है। स्पर्धाओं में सफलता और परीक्षाओं में उन्नति सहज हो जाती है। बशर्ते संयम के साथ कर्मरत रहने के प्रयास किए जाएं।