इसी ऋतु में पौष मास आता है, जो पुष्टि का मास है। इसी मास की पूर्णिमा पुष्य नक्षत्र में आती है, इसीलिए इसे पौष की संज्ञा दी गई है। पुष्य 28 नक्षत्रों (अभिजित सहित) में सर्वश्रेष्ठ और नक्षत्रों का राजा है। ये सारे प्रतीक इस तथ्य के संकेत हैं कि शिशिर में स्वास्थ्य के प्रति सतर्क, सजग और सक्रिय रहना चाहिए। शेष 10 मासों में ऊर्जा के साथ काम को परिणाम तक पहुंचाने के लिए शिशिर में रखी गई सावधानी लाभदायी होती है।